पी एम एम एस वाई से चमोली में ट्राउट मत्स्य पालन को नई रफ्तार, उत्तराखंड में 317 करोड़ से अधिक का निवेश

जनगणमन.लाइव 20 अगस्त पी एम एम एस वाई से चमोली में ट्राउट मत्स्य पालन को नई रफ्तार, उत्तराखंड में 317 करोड़ से अधिक का निवेश

चमोली। हिमालयी जनपद चमोली में ठंडे पानी की मत्स्यपालन गतिविधियों के विस्तार की बड़ी संभावनाओं के बीच प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) क्षेत्र के मत्स्य किसानों के लिए रोजगार और स्वरोजगार का नया अवसर बन रही है। केंद्र सरकार के मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के अनुसार उत्तराखंड में चमोली सहित पर्वतीय जिलों में ट्राउट उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए रेसवे और अन्य आधुनिक मत्स्य अवसंरचनाओं का विस्तार किया गया है।

आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड ने वर्ष 2024-25 में लगभग 710 मीट्रिक टन ट्राउट तथा कुल 10,486 मीट्रिक टन मछली उत्पादन दर्ज किया। राज्य में करीब 2,500 रेसवे संचालित हैं, जिनमें पिथौरागढ़, बागेश्वर और चमोली जैसे जिले शामिल हैं।

उत्तराखंड में ₹317.25 करोड़ का निवेश

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत वर्ष 2020-26 के दौरान देशभर में ₹21,963.48 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें ठंडे पानी वाले राज्यों के लिए ₹5,638.76 करोड़ से अधिक की राशि स्वीकृत हुई है। उत्तराखंड के लिए ₹317.25 करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं।

इन परियोजनाओं में रेसवे, ट्राउट हैचरी, बायोफ्लॉक सिस्टम, मछली दाना उत्पादन इकाइयां, मछली कियोस्क, रेफ्रिजरेटेड परिवहन और अन्य मत्स्य संबंधी सुविधाओं को समर्थन दिया जा रहा है।

चमोली के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ट्राउट की संभावना

ट्राउट पालन सामान्यतः 1,500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में उपयुक्त माना जाता है। ठंडे पानी की मत्स्यपालन के लिए स्वच्छ एवं ठंडे जलस्रोत, पर्याप्त घुलित ऑक्सीजन और उपयुक्त जल गुणवत्ता महत्वपूर्ण हैं। यही कारण है कि हिमालयी क्षेत्रों में रेनबो ट्राउट पालन को विशेष महत्व दिया जा रहा है।

चमोली जैसे पर्वतीय जिले में प्राकृतिक जलस्रोतों, गाड़-गदेरों और ठंडे पानी की उपलब्धता को वैज्ञानिक मत्स्यपालन से जोड़कर ग्रामीण युवाओं, किसानों और स्वयं सहायता समूहों के लिए आय के नए साधन विकसित किए जा सकते हैं।

मत्स्य पालन की स्थिति और आंकड़ेजिले में वर्तमान में 450 रेसवे (तालाब/संरचनाएं) में मछली पालन किया जा रहा है।इसके अलावा 120 नए रेसवे का निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है।मत्स्य विभाग ने इस वर्ष सरकारी और निजी हैचरियों के माध्यम से कुल 24 लाख मत्स्य बीज उत्पादन का लक्ष्य रखा है।पिछले वर्ष बैरागना हैचरी से 7 लाख, तलवाड़ी हैचरी से 1.5 लाख और देवाल ब्लॉक की तीन निजी हैचरियों से 6 लाख से अधिक बीज का उत्पादन हुआ

आधुनिक तकनीक को बढ़ावा

सरकार ठंडे पानी की मत्स्यपालन व्यवस्था में पारंपरिक रेसवे के साथ RAS (Recirculatory Aquaculture System), बायोफ्लॉक, आधुनिक हैचरी, फीडिंग सिस्टम और कोल्ड चेन जैसी तकनीकों को बढ़ावा दे रही है। इससे उत्पादन बढ़ाने के साथ मछली की गुणवत्ता और बाजार तक पहुंच बेहतर करने में मदद मिल सकती है।

पर्यटन से जोड़ा जा सकता है मत्स्यपालन

चमोली में ट्राउट मत्स्यपालन को होमस्टे, ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय खान-पान से जोड़कर एक समग्र ग्रामीण पर्यटन मॉडल विकसित किया जा सकता है। ट्राउट फार्म को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के साथ स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन की व्यवस्था होने पर किसानों को उत्पादन के साथ मूल्य संवर्धन से भी अतिरिक्त आय मिल सकती है।

केंद्र सरकार ने ठंडे पानी की मत्स्यपालन के लिए वर्ष 2026 के मॉडल दिशा-निर्देशों में साइट चयन, हैचरी मानक, रोग प्रबंधन, जैव-सुरक्षा, ब्रांडिंग, ई-ट्रेडिंग और कौशल विकास जैसे विषयों पर भी जोर दिया है।

किसानों के लिए अवसर

PMMSY और इससे जुड़ी अन्य योजनाओं के माध्यम से चमोली के इच्छुक मत्स्य किसानों को ट्राउट रेसवे, हैचरी, फीड यूनिट, प्रसंस्करण, कोल्ड स्टोरेज और विपणन जैसी गतिविधियों में परियोजना आधारित सहायता प्राप्त करने का अवसर मिल सकता है। हालांकि किसी विशेष परियोजना में मिलने वाली सहायता और अनुदान की राशि संबंधित गतिविधि, परियोजना लागत और विभागीय स्वीकृति के अनुसार निर्धारित होगी।

उत्तराखंड में मत्स्य क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है। ऐसे में चमोली में ट्राउट आधारित मत्स्यपालन को ग्रामीण रोजगार, स्वरोजगार और पर्यटन से जोड़ना स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण अवसर बन सकता है।

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