वरिष्ठ पत्रकार व लेखक मनोज इष्टवाल की रचना -कण्वाश्रम–भरत से भारतवर्ष’ को राष्ट्रीय प्रथम पुरस्कार, कोटद्वार और उत्तराखंड का बढ़ा गौरव विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने किया लोकार्पण
‘कण्वाश्रम–भरत से भारतवर्ष’ को राष्ट्रीय प्रथम पुरस्कार, कोटद्वार और उत्तराखंड का बढ़ा गौरव
5 हजार पुस्तकों के बीच देश में प्रथम स्थान, कॉफी टेबल बुक श्रेणी में मिला प्रतिष्ठित सम्मान
कोटद्वार, 24 अगस्त। कण्व नगरी कोटद्वार की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पौराणिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर एक बड़ी पहचान मिली है। वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक मनोज ईष्टवाल की चर्चित पुस्तक ‘कण्वाश्रम–भरत से भारतवर्ष’ को राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। महज एक माह पहले लोकार्पित हुई इस पुस्तक की यह उपलब्धि कोटद्वार के साथ-साथ पूरे उत्तराखंड के लिए गौरव का विषय बन गई है।
विधानसभा अध्यक्ष उत्तराखंड एवं कोटद्वार विधायक ऋतु खण्डूड़ी भूषण और पुस्तक के लेखक मनोज ईष्टवाल ने रविवार को माल गोदाम रोड स्थित कैंप कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में इस महत्वपूर्ण उपलब्धि की जानकारी दी।
ऋतु खण्डूड़ी भूषण ने बताया कि बीती 19 जुलाई को कण्व नगरी कोटद्वार में इस पुस्तक का लोकार्पण किया गया था। लोकार्पण के मात्र एक माह के भीतर ही पुस्तक को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सफलता मिली है। फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स तथा इंटरनेशनल पब्लिशर्स एसोसिएशन, जिनेवा से संबद्ध पुरस्कार प्रक्रिया के तहत आयोजित 46वें पुरस्कार समारोह में पुस्तक को आर्ट एवं कॉफी टेबल बुक श्रेणी में देशभर में प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य गठन के बाद कण्वाश्रम जैसे महत्वपूर्ण विषय पर केंद्रित किसी कॉफी टेबल बुक को राष्ट्रीय स्तर पर इस तरह का प्रथम पुरस्कार मिलना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह सम्मान केवल एक पुस्तक का पुरस्कार नहीं, बल्कि कण्वाश्रम की उस गौरवशाली विरासत का राष्ट्रीय सम्मान है, जिसका संबंध भारतीय इतिहास, संस्कृति और ‘भरत से भारतवर्ष’ की परंपरा से जोड़ा जाता है।
करीब 5 हजार पुस्तकों में चुनी गई सर्वश्रेष्ठ
विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि पुस्तक का प्रकाशन ‘किताब वाले’, नई दिल्ली द्वारा किया गया है। पुस्तक की विषयवस्तु, गहन शोध, आकर्षक प्रस्तुति और प्रकाशन की गुणवत्ता को देखते हुए ज्यूरी ने करीब 5 हजार पुस्तकों के बीच से ‘कण्वाश्रम–भरत से भारतवर्ष’ को प्रथम पुरस्कार के लिए चुना।
उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि कण्वाश्रम के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व को देशभर में नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण साबित होगी।
1989 से शुरू हुआ शोध का सफर
पुस्तक के लेखक एवं वरिष्ठ पत्रकार मनोज ईष्टवाल ने बताया कि कण्वाश्रम पर उनका शोध और कार्य वर्ष 1989 से शुरू हुआ था। वर्ष 1992 में उन्होंने कण्वाश्रम विषय पर डॉक्यूमेंट्री बनाने का काम प्रारंभ किया। इसके बाद वर्ष 1995 में ‘शकुंतला’ नृत्य-नाटिका के रूप में इस विषय को दूरदर्शन लखनऊ और दिल्ली के माध्यम से भी प्रसारित किया गया।
मनोज ईष्टवाल ने बताया कि वर्ष 1988 में ‘फाउंडर ऑफ गढ़वाल राइफल्स’ विषय पर डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाने के दौरान उन्हें कण्वाश्रम के इतिहास और महत्व पर गंभीरता से कार्य करने की प्रेरणा मिली। उस दौर में उत्तर प्रदेश सरकार के तत्कालीन पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. शिवानंद नौटियाल, गढ़वाल भ्रातृ संघ नई दिल्ली के तत्कालीन अध्यक्ष बद्रीश पोखरियाल तथा समाजसेवी गोकुलानंद बर्थवाल के साथ हुई चर्चाओं ने उन्हें इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि दशकों के शोध, अध्ययन और निरंतर प्रयास के बाद तैयार हुई यह पुस्तक आज राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित हुई है। यह सम्मान उनके लिए व्यक्तिगत उपलब्धि से कहीं अधिक कण्वाश्रम की विरासत को मिला सम्मान है।
ऋतु खण्डूड़ी का महत्वपूर्ण सहयोग
मनोज ईष्टवाल ने विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूड़ी भूषण का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कण्वाश्रम से जुड़े वर्षों के शोध को कॉफी टेबल बुक के रूप में देश के सामने लाने में उनका सहयोग और प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।
उन्होंने कहा कि कण्वाश्रम केवल कोटद्वार की स्थानीय पहचान नहीं है, बल्कि यह भारतीय सभ्यता, संस्कृति, इतिहास और परंपरा से जुड़ी एक महत्वपूर्ण धरोहर है। इस पुस्तक के माध्यम से कण्वाश्रम से भरत और भरत से भारतवर्ष तक की गौरवशाली यात्रा को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।
नई पीढ़ी को जड़ों से जोड़ेगा सम्मान
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूड़ी भूषण ने लेखक मनोज ईष्टवाल को बधाई देते हुए कहा कि दशकों लंबे शोध और समर्पण को राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है।
उन्होंने कहा कि कण्वाश्रम की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करना हम सभी की जिम्मेदारी है। ‘कण्वाश्रम–भरत से भारतवर्ष’ को मिला यह प्रतिष्ठित पुरस्कार इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने विश्वास जताया कि यह पुस्तक और इसे मिला राष्ट्रीय सम्मान आने वाली पीढ़ियों को अपनी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ ही कण्वाश्रम के संरक्षण, अध्ययन और व्यापक पहचान के नए द्वार भी खोलेगा।
कुल मिलाकर, ‘कण्वाश्रम–भरत से भारतवर्ष’ को मिला राष्ट्रीय प्रथम पुरस्कार कण्व नगरी कोटद्वार, उत्तराखंड और भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत के लिए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
Leave a Reply