विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर पीएम मोदी ने प्रभावित लोगों के साहस को किया नमन
नई दिल्ली। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 1947 के विभाजन से प्रभावित लोगों के साहस, संघर्ष और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को याद करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि विभाजन का वह दौर ऐसा भयावह समय था, जिसने असंख्य जिंदगियों को प्रभावित किया। अनेक परिवार उजड़ गए, लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया और बड़ी संख्या में लोगों को अत्यधिक पीड़ा झेलनी पड़ी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद प्रभावित लोगों ने शून्य से अपने जीवन की नई शुरुआत की और विपरीत परिस्थितियों को अपनी उपलब्धियों में बदला। उन्होंने देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देकर मानवीय जिजीविषा और दृढ़ संकल्प की शक्ति का उदाहरण प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि विभाजन से उबरकर देश की प्रगति में अमूल्य योगदान देने वाले लोगों का जीवन आने वाली पीढ़ियों को साहस, संघर्ष और संकल्प की प्रेरणा देता रहेगा।
सद्भाव और एकजुटता का संकल्प मजबूत करने की अपील
प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस देश में सद्भाव, भाईचारे और राष्ट्रीय एकजुटता की भावना को मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि सभी देशवासियों को विकसित भारत के निर्माण की दिशा में मिलकर काम करने का संकल्प और मजबूत करना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने सभी से सद्भावना और एकजुटता की राष्ट्रीय भावना को और सशक्त बनाने का आह्वान किया।
परिश्रम और पुरुषार्थ को बताया सफलता का आधार
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् भी साझा किया। इसके माध्यम से उन्होंने परिश्रम, उद्यम और समर्पित प्रयासों के महत्व को रेखांकित किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि निरंतर परिश्रम और प्रयासों से ही विभिन्न कलाओं, विज्ञान, तकनीकी कौशल, शिल्प और नवाचार का विकास होता है तथा सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।
उन्होंने देशवासियों से भाग्य के भरोसे बैठने के बजाय साहस, कर्मठता और निरंतर प्रयासों के साथ अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि पुरुषार्थ ही भाग्य का निर्माता है।
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