रक्त की कमी से जूझ रही महिला की मदद को आगे आए गोपेश्वर के युवा रेड क्रॉस द्वारा किया गया सम्मानित

रक्त की कमी से जूझ रही महिला की मदद को आगे आए गोपेश्वर के युवा
जनगणमन . लाइव 14 अक्टूबर
कर्णप्रयाग अस्पताल में पैथोलॉजिस्ट और संसाधनों की कमी से बढ़ी परेशानी, 40 किमी दूर से पहुंचे परिजन
चमोली। कर्णप्रयाग अस्पताल में भर्ती 28 वर्षीय सोनम पुंडीर की मदद के लिए गोपेश्वर के दो युवा रक्तदाता आगे आए। शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर 5.6 होने के बाद महिला के परिजन रक्त की व्यवस्था में जुट गए। अस्पताल में रक्त निकालने की सुविधा उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आने पर परिवार को परेशानी का सामना करना पड़ा। इसके बाद करीब 40 किलोमीटर दूर गोपेश्वर से रक्त की व्यवस्था की गई।
जानकारी के अनुसार, किमोली के पारतोली गांव निवासी सोनम पुंडीर, पत्नी सतेंद्र पुंडीर, को मंगलवार को कर्णप्रयाग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच में हीमोग्लोबिन का स्तर 5.6 पाया गया। पत्नी की मदद के लिए सतेंद्र पुंडीर ने रक्तदान करने वाले लोगों से संपर्क किया, लेकिन अस्पताल में आवश्यक संसाधनों और पैथोलॉजिस्ट की कमी के चलते रक्त की व्यवस्था नहीं हो पाई।
इसके बाद सतेंद्र ने अपने छोटे भाई नवीन को करीब 40 किलोमीटर दूर गोपेश्वर भेजा। यहां मोहित बिष्ट और प्रदीप भंडारी ने एबी पॉजिटिव रक्तदान कर महिला की मदद की। वहीं, अरविंद पुंडीर ने भी अपने स्तर से एक युवक को भेजकर सहयोग किया।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ अनुराग नें बताया की पिछले 10 महीने से पैथोलॉजिस्ट नहीं है,
इस घटना ने जनपद की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि 10 महीने से से चमोली में स्थायी पैथोलॉजिस्ट की नियुक्ति नहीं हुई है। ऐसे में अस्पतालों में रक्त संबंधी जांच और अन्य आवश्यक चिकित्सा प्रक्रियाओं को लेकर दिक्कतें सामने आने की आशंका बनी रहती है।
रक्त चढ़ाने से पहले रक्त समूह की पुष्टि और क्रॉस-मैचिंग जैसी जरूरी जांच निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल के अनुसार किया जाना आवश्यक है। इसके लिए प्रशिक्षित कार्मिकों, विशेषज्ञता और जरूरी संसाधनों की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। आपातकालीन स्थिति में इन सुविधाओं की कमी मरीजों और उनके परिजनों की मुश्किलें बढ़ा सकती है।विशेषज्ञों की तैनाती की उठी जरूरत
सीमांत जनपद में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति और आवश्यक जांच संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है। सवाल यह भी है कि आपात स्थिति में मरीजों को समय पर रक्त और उपचार उपलब्ध कराने के लिए अस्पतालों में पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं है। रक्तदान कर युवाओं ने मानवीय संवेदना का परिचय दिया,
भारतीय रेड क्रॉस शाखा सचिव सुरेन्द्र रावत एवं. शंकर बिष्ट नें रक्तदाताओं को प्रमाण पत्र देकर धन्यवाद ज्ञापित किया

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