जनगणमन.लाइव | नई दिल्ली 19 अगस्त
तालाबों और जलक्षेत्रों में पारंपरिक रूप से उगाई जाने वाली मखाने की फसल अब किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाले उभरते क्षेत्र के रूप में पहचान बना रही है। केंद्र सरकार ने मखाना क्षेत्र के विकास के लिए 2025-26 से 2030-31 तक 476.03 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय वाली केंद्रीय क्षेत्र योजना को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य खेती से लेकर प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और निर्यात तक पूरी श्रृंखला को मजबूत करना है।
उत्पादन बढ़ाने से लेकर बाजार तक फोकस
PIB की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक योजना में किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने, अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने और खेती से जुड़े कौशल को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही कटाई और कटाई के बाद की तकनीक को बेहतर बनाने, उत्पाद की ब्रांडिंग और मार्केटिंग तथा निर्यात बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
योजना के तहत 2025-26 के लिए 30 करोड़ रुपये और 2026-27 के लिए 90 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। सरकार का लक्ष्य मखाना उत्पादन को आधुनिक तकनीकों से जोड़कर किसानों की उत्पादकता और आय दोनों में सुधार करना है।
भारत हर साल करता है 60 हजार टन से अधिक उत्पादन
PIB के अनुसार भारत में हर वर्ष 0.6 लाख मीट्रिक टन से अधिक मखाने का उत्पादन होता है। इसमें करीब 40 प्रतिशत हिस्सा निर्यात किया जाता है, जबकि बाकी उत्पादन घरेलू बाजार में खपता है।
अमेरिका, कनाडा और संयुक्त अरब अमीरात भारत के मखाना निर्यात के प्रमुख बाजार हैं। वहीं जर्मनी, नेपाल और ऑस्ट्रेलिया जैसे बाजारों में अपेक्षाकृत कम मात्रा के बावजूद मखाने को बेहतर कीमत मिल रही है। इससे निर्यात बाजार में विविधता लाने और किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
‘मिथिला मखाना’ को मिला GI टैग
मखाने की पारंपरिक पहचान को भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूती मिली है। बिहार के मिथिला क्षेत्र में उत्पादित मखाने को ‘मिथिला मखाना’ के नाम से GI टैग प्राप्त है। इससे उत्पाद को विशिष्ट पहचान और कानूनी संरक्षण मिलने के साथ घरेलू और वैश्विक बाजार में ब्रांडिंग की संभावनाएं बढ़ी हैं।
खेती के साथ मछली पालन की भी संभावना
मखाना उत्पादन को आधुनिक कृषि प्रणालियों से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है। राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र की ओर से अधिक उपज देने वाली किस्मों, जल-कुशल खेती और मखाना-सह-मछली पालन जैसी प्रणालियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
PIB के अनुसार अनुसंधान केंद्र ने पिछले कुछ वर्षों में किसानों, कृषि विज्ञान केंद्रों और विभिन्न संस्थानों को 15,824.1 किलोग्राम उच्च उपज वाले मखाना बीज वितरित किए हैं।
मखाने की बढ़ती घरेलू और वैश्विक मांग को देखते हुए सरकार का यह प्रयास ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादन, प्रसंस्करण, रोजगार और निर्यात के नए अवसर पैदा कर सकता है। खासतौर पर छोटे किसानों के लिए मखाना खेती को बेहतर बाजार से जोड़ना ग्रामीण आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।














Leave a Reply