अपने ही मंत्रालय की योजना से ₹99.60 लाख की सब्सिडी लेने पर घिरे केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री, हितों के टकराव पर उठे सवाल
जनगणमन. लाइव नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को राजस्थान के अजमेर जिले में उनके खीरे के पॉलीहाउस प्रोजेक्ट के लिए लगभग ₹99.60 लाख की सरकारी सब्सिडी मिलने का मामला राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यह सब्सिडी राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की उस योजना के तहत दी गई, जो केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में संचालित होती है।
रिपोर्टों के अनुसार परियोजना की कुल लागत लगभग ₹1.99 करोड़ है। योजना के तहत पात्र परियोजनाओं को निर्धारित शर्तों के अनुसार 50 प्रतिशत तक सब्सिडी देने का प्रावधान है, जिसके आधार पर मंत्री के प्रोजेक्ट को लगभग ₹99.60 लाख की सहायता स्वीकृत की गई।
विवाद की वजह क्या है?
विवाद का मुख्य कारण यह नहीं है कि योजना में सब्सिडी का प्रावधान नहीं था, बल्कि यह है कि जिस मंत्रालय के अंतर्गत यह योजना संचालित होती है, उसी मंत्रालय के राज्य मंत्री स्वयं उसके लाभार्थी बने। इसे लेकर विपक्ष और कई राजनीतिक विश्लेषकों ने हितों के टकराव (Conflict of Interest) का प्रश्न उठाया है।
योजना क्या है?
यह सहायता राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) द्वारा संचालित वाणिज्यिक बागवानी विकास योजना के अंतर्गत दी जाती है। इसका उद्देश्य पॉलीहाउस, संरक्षित खेती और उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों को बढ़ावा देना है। योजना के तहत पात्र किसानों और उद्यमियों को निर्धारित मानकों के अनुसार वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
क्या कोई नियम टूटा है?
अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार किसी जांच एजेंसी या न्यायालय ने यह नहीं कहा है कि सब्सिडी अवैध थी या नियमों का उल्लंघन हुआ। विवाद मुख्य रूप से नैतिकता और हितों के टकराव के प्रश्न पर केंद्रित है। यदि आवेदन और स्वीकृति प्रक्रिया योजना के नियमों के अनुरूप हुई है, तो उसकी वैधता का अंतिम निर्धारण सक्षम प्राधिकारी या न्यायिक प्रक्रिया से ही होगा।
नया खुलासा
इसी मामले से जुड़ी एक अन्य रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के परिवार के सदस्यों ने भी पिछले वर्षों में इसी योजना के तहत एक करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी प्राप्त की। इससे योजना के लाभार्थियों और चयन प्रक्रिया को लेकर बहस और तेज हो गई है।
अब इस पूरे मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ तेज हैं और आने वाले दिनों में सरकार तथा विपक्ष दोनों की ओर से इस पर और बयान सामने आने की संभावना है।