बजवाड़ गांव में क्लच वायर में फंसे हिमालयन ब्लैक बियर का वन विभाग ने किया सफल रेस्क्यू
बिना ट्रैंक्यूलाइज किए भालू को सुरक्षित निकाला, मध्य पिंडर और पूर्वी पिंडर रेंज की संयुक्त टीम ने निभाई अहम भूमिका
जनगणमन.लाइव | चमोली | 13 अक्टूबर 2026
चमोली जनपद के बजवाड़ गांव में क्लच वायर में फंसे हिमालयन ब्लैक बियर (हिमालयी काला भालू) को बदरीनाथ वन प्रभाग की संयुक्त वन टीम ने सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर सुरक्षित जंगल की ओर छोड़ दिया। वन विभाग की टीम ने बिना ट्रैंक्यूलाइज किए भालू को फंदे से मुक्त कराया। इस दौरान वन्यजीव और स्थानीय ग्रामीणों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा गया।
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची संयुक्त वन टीम
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बदरीनाथ वन प्रभाग के अंतर्गत मध्य पिंडर रेंज, थराली और पूर्वी पिंडर रेंज, देवाल की संयुक्त वन टीम को बजवाड़ गांव में एक हिमालयन ब्लैक बियर के क्लच वायर में फंसे होने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही वनकर्मी तत्काल मौके पर पहुंचे और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में रेस्क्यू अभियान शुरू किया।
बिना ट्रैंक्यूलाइज किए भालू को निकाला
वन विभाग की टीम ने सूझबूझ और सावधानी के साथ भालू को क्लच वायर से मुक्त कराया। विभाग के अनुसार, भालू को बेहोश करने के लिए ट्रैंक्यूलाइजेशन की आवश्यकता नहीं पड़ी। फंदे से मुक्त होने के बाद भालू सुरक्षित रूप से अपने प्राकृतिक आवास यानी जंगल की ओर लौट गया। रेस्क्यू के दौरान भालू को कोई चोट नहीं आई।
वन अधिकारियों ने टीम की सराहना की
इस सफल रेस्क्यू अभियान पर बदरीनाथ वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी और पिंडर के उप प्रभागीय वनाधिकारी ने संयुक्त वन टीम की तत्परता, सूझबूझ और कर्तव्यनिष्ठा की सराहना की। अधिकारियों ने टीम को बधाई देते हुए वन्यजीव संरक्षण के प्रति इसी तरह प्रतिबद्धता से कार्य करने की अपेक्षा जताई।
मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने की चुनौती
पहाड़ी क्षेत्रों में मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संपर्क के बीच इस तरह के रेस्क्यू अभियान वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। वन विभाग का कहना है कि वन्यजीवों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष को न्यूनतम करने के लिए विभागीय टीमें निरंतर मुस्तैदी से कार्य कर रही हैं।
वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय लोगों की सुरक्षा के लिए विभाग तथा ग्रामीणों के बीच समन्वय आवश्यक है, ताकि वन्यजीवों को सुरक्षित प्राकृतिक आवास मिल सके और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को कम किया जा सके।
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