एसआईआर को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला
मनोज रावत बोले—पात्र मतदाताओं के नाम काटने की साजिश, 97,186 मतदाताओं के नाम हटाने पर उठाए सवाल
जनगणमन.लाइव 5 अक्टूबर 2026
देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उत्तराखंड कांग्रेस की एसआईआर समिति ने आरोप लगाया है कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम हटाने के प्रयास हुए और बड़ी संख्या में फॉर्म-7 का इस्तेमाल आपत्तियां दर्ज करने के लिए किया गया।
पूर्व विधायक केदारनाथ एवं उत्तराखंड कांग्रेस एसआईआर समिति के अध्यक्ष मनोज रावत ने कहा कि कांग्रेस ने एसआईआर के दौरान विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूची से नाम हटाने के कथित प्रयासों का लगातार विरोध किया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के 70 बीएलए-1 और करीब 11,600 बीएलए-2 ने राज्य की 30 विधानसभाओं में मतदाता सूचियों की निगरानी की और कई मामलों में पात्र मतदाताओं के नाम बचाने में सफलता हासिल की।
कांग्रेस के अनुसार, 26-27 जुलाई से कुछ विधानसभा क्षेत्रों में फॉर्म-7 के माध्यम से असामान्य संख्या में आपत्तियां सामने आईं। पार्टी का दावा है कि एक आपत्तिकर्ता द्वारा अकेले करीब 6,500 आपत्तियां दाखिल किए जाने का मामला भी सामने आया। कांग्रेस ने इन मामलों में मुख्य निर्वाचन अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारियों और संबंधित ईआरओ के समक्ष आपत्तियां दर्ज कर प्रत्येक फॉर्म-7 पर नियमानुसार सुनवाई की मांग की।
97,186 मतदाताओं के नाम हटाने पर सवाल
कांग्रेस एसआईआर समिति ने दावा किया कि ड्राफ्ट मतदाता सूची तक पहुंचने वाले करीब 24,30,387 मतदाताओं को तार्किक विसंगतियों अथवा अन्य कारणों से नोटिस दिए गए थे। पार्टी के अनुसार इनमें से 97,186 मतदाताओं ने नोटिस का जवाब नहीं दिया और बाद में इनके संबंध में सिस्टम के माध्यम से फॉर्म-7 सृजित कर नाम मतदाता सूची से हटाए गए।
कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि ऐसे मतदाताओं को व्यक्तिगत रूप से पर्याप्त सुनवाई का अवसर मिला या नहीं। पार्टी का कहना है कि यह प्रक्रिया निर्वाचक नियमावली के प्रावधानों के अनुरूप नहीं होने पर गंभीर कानूनी सवाल खड़े करती है।
हरिद्वार ग्रामीण में 123 नामों का मामला उठाया
कांग्रेस ने हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के बूथ संख्या 65, सराय का उदाहरण देते हुए दावा किया कि 28 सितंबर को 123 मतदाताओं के नाम सूची से हटे पाए गए। पार्टी के अनुसार उसके बीएलए-1 और बीएलए-2 ने मौके पर जांच की तो ये सभी मतदाता संबंधित बूथ क्षेत्र में मौजूद पाए गए।
कांग्रेस का दावा है कि इन मतदाताओं ने बीएलओ को आवश्यक दस्तावेज भी उपलब्ध कराए थे और दस्तावेज सिस्टम में अपलोड किए जाने की जानकारी भी पार्टी प्रतिनिधियों को थी। ऐसे में कांग्रेस ने सवाल उठाया कि दस्तावेज उपलब्ध कराने के बावजूद नाम किस स्तर पर हटाए गए।
पार्टी ने दावा किया कि हरिद्वार ग्रामीण में 28 सितंबर के बाद करीब चार हजार से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए। कांग्रेस ने इस संबंध में चुनाव आयोग, मुख्य निर्वाचन अधिकारी और संबंधित ईआरओ को पत्र भेजने की बात कही है तथा मामले को उच्च न्यायालय अथवा उच्चतम न्यायालय तक ले जाने की चेतावनी दी है।
96,704 फॉर्म-7, लेकिन 7,523 नाम ही हटे
कांग्रेस के अनुसार अंतिम आंकड़ों में 96,704 आपत्तिकर्ताओं ने फॉर्म-7 का इस्तेमाल किया, लेकिन पार्टी के विरोध और कानूनी प्रक्रिया के बाद इनमें से केवल 7,523 मतदाताओं के नाम ही हटाए जा सके। कांग्रेस का कहना है कि इनमें बड़ी संख्या उन मामलों की थी, जिनमें मतदाता अथवा उसके परिजन ने स्वयं संबंधित बूथ से नाम हटाने के लिए आवेदन किया था।
कांग्रेस ने फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग के मामलों में कानूनी कार्रवाई पर भी विचार करने की बात कही है।
झबरेड़ा में भाजपा कार्यकर्ताओं के नाम से फर्जी आपत्तियों का आरोप
कांग्रेस ने झबरेड़ा विधानसभा क्षेत्र का उल्लेख करते हुए दावा किया कि भाजपा से जुड़े करीब 40 आपत्तिकर्ताओं, जिनमें अधिकांश बीएलए बताए गए हैं, ने ईआरओ के समक्ष शपथपत्र देकर कहा कि उनके नाम से फॉर्म-7 की आपत्तियां गलत तरीके से दाखिल की गई थीं।
कांग्रेस ने इन आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए कहा है कि फॉर्म-6, 7 और 8 में गलत सूचना देना कानून के तहत दंडनीय है।
मतदाता संख्या में भारी कमी पर भी सवाल
कांग्रेस एसआईआर समिति ने उत्तराखंड में मतदाताओं की कुल संख्या में आई कमी को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। पार्टी के अनुसार 6 जनवरी 2025 को राज्य में 85,19,271 मतदाता थे। कांग्रेस का दावा है कि प्री-एसआईआर और एसआईआर की विभिन्न प्रक्रियाओं के बाद करीब 13.89 लाख सामान्य मतदाताओं के नाम सूची से कम हुए हैं।
पार्टी ने 45,34,59? दोहरे मतदाताओं के संबंध में भी विधानसभा और बूथवार आंकड़े सार्वजनिक किए जाने की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि अंतिम प्रकाशन के बाद सामान्य और सर्विस मतदाताओं को मिलाकर कुल संख्या लगभग 72.5 लाख के आसपास रह गई है।
कांग्रेस ने कहा कि मतदाताओं की संख्या में इस प्रकार की भारी कमी के कारण यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि पिछले वर्षों में मतदाता संख्या में हुई वृद्धि में कोई गड़बड़ी थी या वर्तमान एसआईआर में बड़ी संख्या में नाम हटाए गए।
राहुल गांधी के आरोपों से जोड़ते हुए उठाया ‘वोट चोरी’ का मुद्दा
मनोज रावत ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी पिछले कुछ वर्षों से देश में कथित ‘वोट चोरी’ और मतदाता सूची में अनियमितताओं का मुद्दा उठाते रहे हैं। उत्तराखंड कांग्रेस का कहना है कि एसआईआर के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने ऐसे कई मामलों को सामने लाया है, जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
कांग्रेस ने चुनाव आयोग से दोहरे मतदाताओं की पहचान और उन्हें हटाने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने तथा मतदाता सूची से नाम हटाने की पूरी प्रक्रिया का विधानसभा और बूथवार विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है।
फॉर्म-6 के जरिए नाम जोड़ने की प्रक्रिया पर भी आपत्ति
कांग्रेस ने एसआईआर के बाद मतदाता सूची से हटे लोगों को फॉर्म-6 के माध्यम से नाम जोड़ने के अभियान पर भी कानूनी सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि फॉर्म-6 में पहली बार मतदाता बनने संबंधी घोषणा होती है, जबकि पहले से मतदाता रहे और बाद में गलत तरीके से हटाए गए व्यक्ति के लिए ऐसी घोषणा करना कानूनी रूप से जटिल स्थिति पैदा कर सकता है।
कांग्रेस का आरोप है कि इस स्थिति में गलत तरीके से नाम हटाए जाने की कीमत भी निर्दोष मतदाता को चुकानी पड़ सकती है।
चुनाव आयोग की भूमिका पर उठाए गंभीर सवाल
मनोज रावत ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग फर्जी फॉर्म-7 के इस्तेमाल को रोकने और ऐसे आवेदनकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करने में प्रभावी कदम नहीं उठा पाया। कांग्रेस ने कुछ मामलों में अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
हालांकि, ये सभी आरोप उत्तराखंड कांग्रेस एसआईआर समिति द्वारा लगाए गए हैं और चुनाव आयोग अथवा संबंधित अधिकारियों का पक्ष इस प्रेस नोट में उपलब्ध नहीं है। ऐसे आरोपों की स्वतंत्र और दस्तावेज आधारित जांच के बाद ही इनके संबंध में अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकता है।
बीएलओ और कर्मचारियों की कांग्रेस ने की प्रशंसा
कांग्रेस ने एसआईआर प्रक्रिया में लगे बीएलओ, कर्मचारियों और अधिकारियों के काम की भी सराहना की। पार्टी ने विशेष रूप से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा बीएलओ के रूप में किए गए कार्य की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने तकनीकी रूप से कठिन प्रक्रिया को कुशलता से पूरा किया।
कांग्रेस ने राज्य के निर्वाचन अधिकारियों द्वारा शिकायतों पर कार्रवाई की कोशिशों की भी सराहना की और कहा कि एसआईआर प्रक्रिया का बड़ा हिस्सा दिल्ली से नियंत्रित होने के कारण राज्य स्तर के अधिकारियों की भूमिका सीमित रही।
समिति ने एसआईआर से संबंधित खामियों को सामने लाने में सहयोग करने वाले पत्रकारों, समाचार चैनलों, पोर्टलों, फोटो पत्रकारों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स का भी आभार व्यक्त किया














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