थराली विधानसभा सीट पर गणेश शाह रेस मे, अनिल बलूनी की पैरवी पर टिकी निगाहें

जनगणमन.लाइव 16 अगस्त 

थराली विधानसभा सीट पर गणेश शाह रेस मे, अनिल बलूनी की पैरवी पर टिकी निगाहें

गोपेश्वर। चमोली जिले की अनुसूचित जाति आरक्षित थराली विधानसभा सीट पर वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा के भीतर दावेदारों की सक्रियता तेज होने लगी है। इसी कड़ी में कर्णप्रयाग नगर पालिका अध्यक्ष गणेश शाह की संभावित दावेदारी ने पार्टी के भीतर राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

पूर्व विधायक स्वर्गीय मगन लाल शाह और पूर्व विधायक स्वर्गीय मुन्नी देवी शाह के पुत्र गणेश शाह वर्तमान में कर्णप्रयाग नगर पालिका के अध्यक्ष हैं। वह चमोली जिला पंचायत के कोठली वार्ड से सदस्य भी रह चुके हैं और भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चे के जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। ऐसे में थराली क्षेत्र में उनकी सांगठनिक पकड़ और राजनीतिक सक्रियता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

गणेश शाह की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी थराली से गहराई से जुड़ी रही है। विधायक रहते हुए उनके पिता मगन लाल शाह के निधन के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा ने उनकी पत्नी मुन्नी देवी शाह को प्रत्याशी बनाया था। उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया, हालांकि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया और भूपाल राम टम्टा को मैदान में उतारा। टम्टा चुनाव जीतकर विधायक बने।

अब 2027 की तैयारियों के बीच गणेश शाह की थराली में बढ़ती सक्रियता को संभावित दावेदारी के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि वह सार्वजनिक तौर पर स्वयं को पार्टी का अनुशासित कार्यकर्ता बताते हुए टिकट का फैसला संगठन और शीर्ष नेतृत्व पर छोड़ने की बात करते हैं। उनका कहना है कि पार्टी यदि उन्हें जिम्मेदारी देती है तो वह संगठन की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए पूरी ताकत से काम करेंगे।

पालिका अध्यक्ष हैं, तीन साल का कार्यकाल बाकी

गणेश शाह की दावेदारी का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि वह फिलहाल कर्णप्रयाग नगर पालिका अध्यक्ष हैं और उनके कार्यकाल के करीब तीन वर्ष अभी शेष हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या वह पालिका अध्यक्ष की जिम्मेदारी के बीच विधानसभा चुनाव के लिए थराली में पूरी तरह सक्रिय होकर अपनी दावेदारी को मजबूत कर पाएंगे।

हालांकि राजनीतिक रूप से देखें तो नगर पालिका अध्यक्ष का पद उनके लिए क्षेत्रीय संपर्क, संगठनात्मक सक्रियता और जनाधार विस्तार का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।

अनिल बलूनी से नजदीकी भी बन सकती है महत्वपूर्ण कड़ी

गणेश शाह की दावेदारी के बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी के साथ उनकी राजनीतिक नजदीकी को लेकर भी पार्टी के भीतर चर्चा है। ऐसे में 2027 के टिकट वितरण के दौरान यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बलूनी गणेश शाह के पक्ष में प्रभावी पैरवी कर पाते हैं।

बलूनी के चमोली की राजनीति में पुराने राजनीतिक संपर्कों को देखते हुए यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या बद्रीनाथ में राजेंद्र भंडारी, कर्णप्रयाग में सतीश लखेड़ा और अब थराली में गणेश शाह के लिए अनिल बलूनी मजबूत राजनीतिक पैरवी की भूमिका निभा पाएंगे?

हालांकि अंतिम निर्णय भाजपा का केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व ही करेगा, लेकिन टिकट की दौड़ में नेताओं के बीच राजनीतिक समीकरण और संगठन के भीतर उनकी स्वीकार्यता महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

टम्टा के सामने भी चुनौती

मौजूदा विधायक भूपाल राम टम्टा भी अपनी दावेदारी को लेकर सक्रिय हैं। क्षेत्र में लगातार उनकी मौजूदगी इस बात का संकेत दे रही है कि वह वर्ष 2027 में एक बार फिर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की उम्मीद कर रहे हैं। मौजूदा विधायक होने के कारण स्वाभाविक रूप से उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है।

वहीं भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चे के जिलाध्यक्ष नरेंद्र भारती भी थराली से संभावित दावेदारों में अपना स्थान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके पिता प्रेम लाल भारती भी राज्य के शुरुआती विधानसभा चुनावों में चुनाव मैदान में उतर चुके हैं। इसके अलावा जड़ी-बूटी सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष बलवीर घुनियाल लंबे समय से थराली से टिकट की दावेदारी करते रहे हैं। वर्ष 2018 के थराली उपचुनाव में भी उन्होंने टिकट की दावेदारी की थी, लेकिन भाजपा ने उस समय मुन्नी देवी शाह को प्रत्याशी बनाया था।

भाजपा का गढ़ रही है थराली

थराली विधानसभा सीट के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो भाजपा का यहां मजबूत प्रभाव रहा है। वर्ष 2002 में भाजपा के गोविंद लाल शाह ने जीत दर्ज की और 2007 में भी वह तत्कालीन पिंडर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक बने। वर्ष 2012 में कांग्रेस के डॉ. जीत राम ने जीत हासिल की, लेकिन इसके बाद 2017, 2018 के उपचुनाव और 2022 में भाजपा ने लगातार जीत दर्ज की।

ऐसे में 2027 के चुनाव से पहले भाजपा के भीतर टिकट को लेकर बढ़ती दावेदारी अपने आप में महत्वपूर्ण है। गणेश शाह की एंट्री ने मुकाबले को और रोचक बना दिया है। अब देखना होगा कि पार्टी मौजूदा विधायक भूपाल राम टम्टा पर दोबारा भरोसा जताती है या मगन लाल शाह परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए गणेश शाह को मौका देती है।

फिलहाल थराली भाजपा में टिकट की दौड़ शुरू हो चुकी है और आने वाले महीनों में यह मुकाबला और तेज होने के आसार हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि गणेश शाह अपनी सांगठनिक सक्रियता, पारिवारिक राजनीतिक विरासत और अनिल बलूनी से अपने संबंधों को टिकट की मजबूत दावेदारी में कितना बदल पाते हैं।

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