हरिद्वार संत समागम में गूंजा ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ का मुद्दा, शिवराज और धामी ने बताया राष्ट्रहित का संकल्प
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा—बार-बार चुनाव विकास में बाधक, संत समाज से जनजागरण का आह्वान
हरिद्वार। प्राचीन अवधूत मंडल आश्रम में आयोजित संत समागम में रविवार को ‘एक राष्ट्र–एक चुनाव’ का मुद्दा प्रमुखता से उठा। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने संत समाज के बीच इस विषय पर अपने विचार रखते हुए इसे केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रहित, सुशासन, जनकल्याण और विकास की निरंतरता से जुड़ा विषय बताया।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘एक राष्ट्र–एक चुनाव’ के संकल्प को देश की वर्तमान आवश्यकता बताते हुए कहा कि बार-बार होने वाले चुनाव देश की विकास गति को प्रभावित करते हैं। उन्होंने कहा कि लगातार चुनावी प्रक्रिया में समय, धन और प्रशासनिक ऊर्जा का व्यापक उपयोग होता है, जिसका असर विकास और जनसेवा के कार्यों पर पड़ता है।
चौहान ने कहा कि चुनावों के दौरान स्कूलों, प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस और अन्य सरकारी मशीनरी का बड़ा हिस्सा चुनाव संबंधी कार्यों में लग जाता है। आचार संहिता लागू होने के कारण अनेक विकास कार्यों की गति भी प्रभावित होती है। ऐसे में यदि लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ कराए जाते हैं तो सार्वजनिक संसाधनों की बचत होगी और प्रशासन अधिक समय तक विकास एवं जनसेवा पर ध्यान केंद्रित कर सकेगा।
उन्होंने संत समाज से इस विषय पर व्यापक जनजागरण करने की अपील की। श्री चौहान ने कहा कि संत-महात्माओं का समाज पर गहरा प्रभाव है और उनके मार्गदर्शन से राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर सकारात्मक जनमत तैयार किया जा सकता है। उन्होंने संत समाज से अपने प्रवचनों और सामाजिक संवाद के माध्यम से ‘एक राष्ट्र–एक चुनाव’ के विचार को जनता तक पहुंचाने का आग्रह किया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह किसी एक राजनीतिक दल का विषय नहीं है, बल्कि पूरे देश से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने कहा, “देश पहले है और पार्टी बाद में। देश आगे बढ़ेगा तो लोकतंत्र और राजनीतिक दल भी मजबूत होंगे।”
वंदे मातरम के पूरे स्वरूप का भी किया समर्थनअपने संबोधन में शिवराज सिंह चौहान ने वंदे मातरम के महत्व पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने इसे देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताते हुए संत समाज से पूरे गान के समर्थन में जनभावना तैयार करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि मातृभूमि की वंदना देश की एकता और राष्ट्रीय चेतना से जुड़ी भावना है और भारत को अब किसी भी प्रकार की विभाजनकारी सोच से दूर रखना होगा। उन्होंने संत समाज से आग्रह किया कि वह अपने प्रवचनों के माध्यम से राष्ट्रीय एकता, अखंडता और देशभक्ति की भावना को और मजबूत करे।
‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ राष्ट्रहित और सुशासन का विषय : धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रहित, सुशासन, जनकल्याण और देश के संसाधनों के बेहतर उपयोग से जुड़ा राष्ट्रीय विषय है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और चुनाव लोकतंत्र के महापर्व के समान हैं। लेकिन निरंतर चुनावी प्रक्रिया का प्रभाव शासन–प्रशासन और विकास कार्यों की निरंतरता पर भी पड़ता है।
उन्होंने कहा कि बार-बार चुनाव होने से आदर्श आचार संहिता लागू होती है और बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षक, पुलिसकर्मी तथा सुरक्षा बल चुनावी दायित्वों में लगाए जाते हैं। यदि एक साथ चुनाव कराए जाने से सार्वजनिक धन और संसाधनों की बचत होती है तथा प्रशासन को जनसेवा और विकास कार्यों के लिए अधिक समय मिलता है तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।
विकसित भारत-2047 के लिए विकास की निरंतर गति जरूरी
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ के विषय को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में लाकर इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने के लिए विकास की निरंतर गति बनाए रखना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। ऐसे समय में शासन और प्रशासन का अधिकतम समय विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना और जनकल्याण से जुड़े कार्यों पर लगाया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने संत-महात्माओं से इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विषय पर समाज का मार्गदर्शन करने का आग्रह करते हुए कहा कि भारत की सनातन परंपरा में संत समाज ने हमेशा राष्ट्र और समाज को दिशा देने का काम किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार और समाज का साझा संकल्प होना चाहिए कि लोकतंत्र मजबूत हो, विकास निरंतर चलता रहे, संस्कृति सुरक्षित रहे और राष्ट्र सर्वोपरि हो।
हरिद्वार के संत समागम में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मौजूदगी के बीच ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ को लेकर जनजागरण, राष्ट्रीय एकता और विकसित भारत के संकल्प को आगे बढ़ाने का संदेश प्रमुखता से उभरा।
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