जंगल में लावारिस मिला नवजात 15 दिन जिंदगी से जूझने के बाद हारा, बाल कल्याण समिति के संरक्षण में चल रहा था उपचार

जनगणमन.लाइव 21 अगस्त

जंगल में लावारिस मिला नवजात 15 दिन जिंदगी से जूझने के बाद हारा, सरकारी एजेंसियों ने दिया था संरक्षण

गोपेश्वर/चमोली। चमोली जिले के रांगतोली गांव के समीप जंगल में लावारिस अवस्था में मिला एक नवजात आखिरकार जिंदगी की जंग हार गया। करीब 15 दिन तक विभिन्न चिकित्सा संस्थानों में उसका उपचार चलता रहा, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। इस दौरान पुलिस और संबंधित सरकारी एजेंसियों ने नवजात को संरक्षण में लेकर उसके उपचार और देखभाल की व्यवस्था की थी। नवजात के परिजनों का हालांकि अंतिम समय तक कोई पता नहीं चल पाया।

जानकारी के अनुसार, बीती 6 अगस्त की सुबह रांगतोली गांव के समीप जंगल में एक नवजात लावारिस हालत में पड़ा मिला था। स्थानीय लोगों ने नवजात को देखा तो इसकी सूचना तत्काल पुलिस और प्रशासन को दी गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और नवजात को अपने संरक्षण में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की गई।

पुलिस द्वारा नवजात के माता-पिता और परिजनों की तलाश भी शुरू की गई, लेकिन काफी प्रयासों के बावजूद उसके संबंध में कोई जानकारी नहीं मिल सकी। इसके बाद संबंधित सरकारी एजेंसियों की देखरेख में नवजात को चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।

नवजात की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे उपचार के लिए श्रीनगर मेडिकल कॉलेज भेजा गया, जहां चिकित्सकों की देखरेख में उसका इलाज किया गया।।

बताया गया कि शुक्रवार देर रात तबियत बिगड़ने के बाद नवजात की मौत हो गयी

 

करीब 15 दिन तक जिंदगी से संघर्ष करने के बाद नवजात ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। इस दुखद घटना ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है।

सबसे मार्मिक पहलू यह रहा कि जिस नवजात को जंगल में लावारिस अवस्था में पाया गया था, उसके माता-पिता और परिजनों की पहचान उसके जीवनकाल में नहीं हो सकी।

पुलिस और संबंधित विभाग अब मामले से जुड़े सभी पहलुओं की आवश्यक कार्रवाई कर रहे हैं।

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