गोपेश्वर में स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज मास्टर प्लान के प्रथम चरण को मिली वित्तीय स्वीकृति, 58.95 करोड़ की योजना के लिए 1.179 करोड़ रुपये मंजूर
जनगणमन.लाइव | चमोली | 15 अक्टूबर 2026
गोपेश्वर। चमोली जनपद मुख्यालय गोपेश्वर में बरसाती पानी की निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने और नगर को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। उत्तराखंड शासन के सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण अनुभाग की ओर से वित्तीय वर्ष 2026-27 में गोपेश्वर नगर के स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज मास्टर प्लान के प्रथम चरण के लिए वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है। शासन के 14 अक्टूबर 2026 के पत्र के अनुसार, इस परियोजना की कुल लागत 58.95 करोड़ रुपये निर्धारित है, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में इसके लिए 1.179 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है।
प्रमुख सचिव, उत्तराखंड शासन को संबोधित तथा प्रमुख अभियंता, सिंचाई विभाग को प्रेषित शासनादेश में प्रदेश के विभिन्न जनपदों में जीआईएस आधारित स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज योजनाओं के लिए राज्य आकस्मिकता निधि से अग्रिम धनराशि आहरित कर वित्तीय स्वीकृति दिए जाने का उल्लेख किया गया है।
प्रदेश की 16 योजनाओं में शामिल है गोपेश्वर
शासनादेश के संलग्नक के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न जनपदों में कुल 16 जीआईएस आधारित स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज योजनाओं की कुल लागत 2,039.31 करोड़ रुपये है। इन योजनाओं के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में कुल 40.786 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। इनमें चमोली जनपद के गोपेश्वर नगर की योजना भी प्रमुखता से शामिल है।
गोपेश्वर की इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बरसाती पानी की निकासी के लिए एक सुव्यवस्थित ड्रेनेज मास्टर प्लान तैयार कर उसके प्रथम चरण को धरातल पर उतारना है। हालांकि, शासनादेश में इस चरण के अंतर्गत होने वाले कार्यों के स्थानवार विवरण और निर्माण शुरू होने की तिथि का उल्लेख अभी नहीं किया गया है।
नगर पालिका अध्यक्ष ने जताया मुख्यमंत्री का आभार, भूस्खलन से मिलेगी सुरक्षा
इस महत्वपूर्ण स्वीकृति पर खुशी व्यक्त करते हुए नगर पालिका अध्यक्ष गोपेश्वर, संदीप रावत ने मुख्यमंत्री का हार्दिक आभार जताया है। उन्होंने कहा कि गोपेश्वर नगर के लिए स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज योजना अत्यंत आवश्यक थी।
नगर पालिका अध्यक्ष ने रेखांकित किया कि बारिश के पानी की सही निकासी न होने के कारण नगर में लगातार भूस्खलन का खतरा बना रहता था। इस मास्टर प्लान के लागू होने से पानी का व्यवस्थित निस्तारण हो सकेगा, जिससे गोपेश्वर नगर को भूस्खलन के संभावित खतरे से सुरक्षा मिल सकेगी और नगरवासियों को बड़ी राहत मिलेगी।
पारदर्शिता और गुणवत्ता के लिए तय की गई शर्तें
शासनादेश में स्वीकृत धनराशि के उपयोग के लिए कड़े नियम व शर्तें निर्धारित की गई हैं, जिनमें शामिल हैं:
* कार्य शुरू करने से पहले विस्तृत आगणन एवं आवश्यक तकनीकी औपचारिकताएं पूरी करना।
* संबंधित विभागों से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करना।
* निर्माण कार्यों की तृतीय पक्ष (Third Party) गुणवत्ता जांच सुनिश्चित करना।
* स्वीकृत धनराशि का उपयोग केवल निर्धारित उद्देश्य के लिए ही करना तथा वित्तीय नियमों का पूर्ण पालन करना।
* परियोजना की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की नियमित रिपोर्टिंग शासन को भेजना।
शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि स्वीकृत धनराशि का उपयोग चालू वित्तीय वर्ष में ही किया जाना अनिवार्य है।
अब कार्यान्वयन पर रहेगी नजर
गोपेश्वर नगर में बरसाती पानी की निकासी एक महत्वपूर्ण शहरी और सुरक्षात्मक आवश्यकता है। 58.95 करोड़ रुपये की प्रस्तावित लागत वाली इस ड्रेनेज मास्टर प्लान परियोजना के प्रथम चरण के लिए 1.179 करोड़ रुपये की शुरुआती वित्तीय स्वीकृति मिलने के बाद अब आगे की तकनीकी व प्रशासनिक प्रक्रिया और धरातल पर कार्यों की प्रगति पर सभी की नजर रहेगी। परियोजना के शेष चरणों के लिए धनराशि के आवंटन और निर्माण कार्यों की समयसीमा के संबंध में आगे की कार्रवाई अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।
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