गैरसैंण में आज से दो दिवसीय विधानसभा सत्र, चुनावी साल में सरकार और विपक्ष की अग्निपरीक्षा
मुख्यमंत्री धामी सदन में प्रस्तुत करेंगे अनुपूरक अनुदान मांगें, स्थायी राजधानी, अंकिता भंडारी हत्याकांड, बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाओं के मुद्दों पर विपक्ष का भराड़ीसैंण कूच
जनगणमन.लाइव | गैरसैंण, 27 अक्टूबर।
उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में आज से दो दिवसीय विधानसभा सत्र शुरू हो रहा है। चुनावी वर्ष में आयोजित इस सत्र को लेकर प्रदेश की राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सदन में अनुपूरक अनुदान मांगें प्रस्तुत करेंगे। वहीं, कांग्रेस, उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) सहित विभिन्न विपक्षी दलों ने प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी की है।
यह सत्र इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसे मौजूदा सरकार के कार्यकाल का अंतिम विधानसभा सत्र बताया जा रहा है। ऐसे में सदन की कार्यवाही, सरकार की वित्तीय प्राथमिकताओं और जनसमस्याओं पर होने वाली चर्चा पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हैं।
स्थायी राजधानी से अंकिता भंडारी हत्याकांड तक उठेंगे सवाल
विधानसभा सत्र के दौरान गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित करने, अंकिता भंडारी हत्याकांड, बेरोजगारी, सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं जैसे मुद्दों पर विपक्ष सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है। कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दलों ने इन मुद्दों को लेकर भराड़ीसैंण कूच का ऐलान किया है।
गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग उत्तराखंड राज्य गठन के बाद से ही एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और जनभावनात्मक मुद्दा रही है। पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों को उम्मीद है कि राजधानी से जुड़े सवाल पर सरकार अपनी स्थिति स्पष्ट करेगी और पहाड़ की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ठोस कदम उठाएगी।
वहीं, अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर न्याय और जवाबदेही से जुड़े सवाल भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकते हैं। बेरोजगारी, युवाओं के भविष्य और पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क एवं स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर भी विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है।
अनुपूरक अनुदान मांगों पर रहेगी नजर
मुख्यमंत्री धामी द्वारा सदन में प्रस्तुत की जाने वाली अनुपूरक अनुदान मांगें इस सत्र का प्रमुख विधायी और वित्तीय विषय रहेंगी। इसके माध्यम से वित्तीय वर्ष के दौरान अतिरिक्त व्यय के लिए आवश्यक धनराशि से संबंधित मांगें सदन के समक्ष रखी जाएंगी। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभिन्न विभागों और योजनाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय प्रावधानों को लेकर सरकार क्या प्रस्ताव रखती है।
चमोली सहित प्रदेश के पर्वतीय और सीमांत जिलों में सड़क संपर्क, स्वास्थ्य सुविधाओं, रोजगार, शिक्षा और ग्रामीण आजीविका से जुड़े सवाल लंबे समय से महत्वपूर्ण बने हुए हैं। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि सरकार की वित्तीय प्राथमिकताओं में इन क्षेत्रों की आवश्यकताओं को पर्याप्त महत्व मिलेगा।
सदन के भीतर और बाहर आमने-सामने होंगे सरकार और विपक्ष
दो दिवसीय सत्र के दौरान जहां सरकार अपनी वित्तीय प्राथमिकताओं और विकास संबंधी योजनाओं को सामने रखेगी, वहीं विपक्ष जनहित के मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही तय करने की कोशिश करेगा। भराड़ीसैंण कूच के जरिए विपक्ष सदन के बाहर भी इन सवालों को प्रमुखता से उठाएगा।
चुनावी वर्ष में इस सत्र का महत्व केवल विधायी कार्यवाही तक सीमित नहीं है। प्रदेश की जनता यह देखना चाहेगी कि लंबे समय से उठाए जा रहे स्थानीय मुद्दों पर सरकार क्या जवाब देती है और उनके समाधान के लिए कौन से ठोस कदम सामने आते हैं।
अब सबकी निगाहें गैरसैंण पर टिकी हैं। सवाल है कि क्या इस दो दिवसीय सत्र में स्थायी राजधानी, रोजगार, अंकिता भंडारी प्रकरण और पर्वतीय क्षेत्रों की बुनियादी समस्याओं पर कोई ठोस पहल सामने आएगी, या ये मुद्दे एक बार फिर सदन के भीतर और बाहर राजनीतिक बहस तक ही सीमित रह जाएंगे।
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