जगतोली मिनी स्टेडियम निर्माण पर पूर्व विधायक मनोज रावत के गंभीर आरोप, थर्ड पार्टी जांच की मांग
रुद्रप्रयाग 6 अगस्त 2026। केदारनाथ के पूर्व विधायक मनोज रावत ने जगतोली में निर्माणाधीन मिनी स्टेडियम के निर्माण कार्य पर गंभीर सवाल उठाते हुए कथित अनियमितताओं और सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका जताई है। उन्होंने जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग को पत्र भेजकर स्टेडियम का हैंडओवर किए जाने से पहले स्वतंत्र विशेषज्ञ संस्था से थर्ड पार्टी तकनीकी जांच कराने की मांग की है।
पूर्व विधायक ने बताया कि हाल ही में दशज्युला-क्यूडी-मलास क्षेत्र के आपदा प्रभावित गांवों के दौरे के दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने उनका ध्यान निर्माणाधीन मिनी स्टेडियम की ओर आकर्षित किया। इसके बाद उन्होंने स्वयं मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य का निरीक्षण किया।
मनोज रावत का कहना है कि मैदान का विस्तारीकरण और समतलीकरण उनके विधायक कार्यकाल में विधायक निधि से कराया गया था। उनके अनुसार वर्तमान में दिखाई दे रहा मैदान पहले ही तैयार हो चुका था, जबकि वर्तमान निर्माण कार्य को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मिनी स्टेडियम परियोजना की प्रारंभिक लागत करीब एक करोड़ रुपये बताई गई थी। शिलान्यास के समय 400 मीटर एथलेटिक्स ट्रैक, फुटबॉल मैदान, जिम, चेंजिंग रूम सहित आधुनिक खेल सुविधाएं विकसित करने का दावा किया गया था, लेकिन मौके पर अधिकांश सुविधाएं दिखाई नहीं देतीं।
पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताओं की जानकारी दी है। उनका दावा है कि मैदान में वास्तविक खुदाई बहुत कम हुई, जबकि अभिलेखों में लगभग 40 लाख रुपये की खुदाई दर्शाई गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण के दौरान किसी जिम्मेदार इंजीनियर की नियमित निगरानी भी स्थानीय लोगों को नजर नहीं आई।
मनोज रावत ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि निर्माण कार्य भारतीय को-ऑपरेटिव ग्रामीण विकास एवं निर्माण लिमिटेड नामक एजेंसी द्वारा कराया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब उत्तराखंड में लोक निर्माण विभाग, आरईएस सहित कई सरकारी निर्माण एजेंसियां उपलब्ध हैं, तब बाहरी एजेंसी को कार्य सौंपने की आवश्यकता क्यों पड़ी। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पूर्व विधायक का कहना है कि उन्हें सूचना मिली है कि निर्माण एजेंसी जल्द ही कार्य पूर्ण दर्शाकर स्टेडियम का हैंडओवर करने की तैयारी में है। ऐसे में उन्होंने मांग की है कि हैंडओवर से पहले किसी स्वतंत्र विशेषज्ञ संस्था से थर्ड पार्टी तकनीकी निरीक्षण कराया जाए, ताकि निर्माण की गुणवत्ता और खर्च की वास्तविकता सामने आ सके।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग को पत्र भेज दिया गया है। साथ ही कहा कि परियोजना की डीपीआर और थर्ड पार्टी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ही पूरे मामले पर आगे विस्तृत टिप्पणी की जाएगी।