ज्योतिर्मठ से मातृशक्ति तक पहुंच रही ‘सौन्दर्यलहरी’ की साधना
नन्दाष्टमी पर विशेष पहल बनी आकर्षण का केंद्र, प्रथम चरण में 9 माताओं ने पूरा किया विधिवत अध्ययन
जनगणमन.लाइव
19 सितंबर 2026 | ज्योतिर्मठ, चमोली
ज्योतिर्मठ। आदि शंकराचार्य की तपस्थली और उत्तर भारत के प्रमुख आध्यात्मिक केंद्रों में शामिल ज्योतिर्मठ इन दिनों एक अभिनव आध्यात्मिक प्रकल्प का केंद्र बना हुआ है। यहां मातृशक्ति को भगवती आराधना की परंपरा से जोड़ने के उद्देश्य से ‘सौन्दर्यलहरी’ स्तोत्र के शुद्ध उच्चारण एवं विधिवत पाठ का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

परमपूज्य ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती ‘1008’ जी महाराज के दण्डी शिष्य स्वामी प्रत्यक्चैतन्यमुकुन्दानन्द गिरि जी के मार्गदर्शन में चल रहे इस प्रकल्प ने ज्योतिर्मठ की आध्यात्मिक गतिविधियों में एक नया आयाम जोड़ा है। इसका उद्देश्य ज्योतिर्मठ की धरती से भगवती आराधना की इस परंपरा को मातृशक्ति के माध्यम से व्यापक स्तर तक पहुंचाना है।
ज्योतिर्मठ की आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ा प्रकल्प
ज्योतिर्मठ का संबंध आदि शंकराचार्य की हिमालय यात्रा और सनातन धर्म की परंपरा से गहराई से जुड़ा रहा है। परंपरा के अनुसार आदिशंकराचार्य ने ज्योतिर्मठ को केंद्र बनाकर श्री बदरीनाथ धाम के उद्धार एवं पुनरुद्धार सहित अनेक महत्वपूर्ण धार्मिक कार्य किए। उन्होंने अपने परम गुरुभक्त शिष्य तोटकाचार्य को ज्योतिर्मठ का प्रथम आचार्य नियुक्त किया।
इसी ऐतिहासिक आध्यात्मिक पृष्ठभूमि में ‘सौन्दर्यलहरी’ पाठ का यह प्रकल्प ज्योतिर्मठ में शुरू किया गया है। इसके माध्यम से महिलाओं को स्तोत्र का शुद्ध उच्चारण, पाठ की विधि तथा भगवती आराधना के विभिन्न आयामों से परिचित कराया जा रहा है।
दक्षिण भारत की परंपरा को ज्योतिर्मठ से उत्तराखंड तक ले जाने का प्रयास
‘सौन्दर्यलहरी’ आदिशंकराचार्य से संबद्ध प्रसिद्ध देवी-उपासना स्तोत्र है। दक्षिण भारत में लंबे समय से बड़ी संख्या में मातृशक्ति द्वारा इसका नियमित पाठ किया जाता रहा है।
अब ज्योतिर्मठ में इस परंपरा को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रकल्प से जुड़े लोगों का संकल्प है कि ज्योतिर्मठ से शुरू हुई यह साधना धीरे-धीरे उत्तराखंड के अन्य क्षेत्रों तक पहुंचे और अधिक से अधिक माताएं-बहनें इससे जुड़ें।
पहले चरण में 9 माताओं ने पूरा किया अध्ययन
प्रकल्प के प्रथम चरण में ज्योतिर्मठ क्षेत्र की 9 माताओं ने ‘सौन्दर्यलहरी’ का विधिपूर्वक अध्ययन पूर्ण किया है। अब ये साधिकाएं स्वयं इस पाठ को आगे अन्य महिलाओं तक पहुंचाने की दिशा में कार्य करेंगी।
स्वामी प्रत्यक्चैतन्यमुकुन्दानन्द गिरि जी का संकल्प है कि ज्योतिर्मठ सहित पूरे उत्तराखंड की मातृशक्ति इस आध्यात्मिक परंपरा से जुड़े और भगवती आराधना की यह धारा घर-घर तक पहुंचे।
साधिकाओं ने बताए अपने अनुभव
अध्ययन पूर्ण करने वाली मनोहर बाग निवासी शान्ति चौहान ने बताया कि नियमित सौन्दर्यलहरी पाठ से उन्हें मानसिक शांति की अनुभूति हो रही है।
रविग्राम निवासी सुषमा डिमरी ने कहा कि इस पाठ को सीखना उनके लिए आध्यात्मिक रूप से अत्यंत सुखद अनुभव रहा। वहीं सुनील निवासी गीता परमार भी स्तोत्र की महिमा बताते हुए भाव-विभोर हो जाती हैं।
नन्दाष्टमी ने दिया विशेष अवसर
नन्दाष्टमी के अवसर पर ज्योतिर्मठ में संचालित यह प्रकल्प इसलिए भी विशेष महत्व रखता है क्योंकि हिमालयी समाज में भगवती नन्दा को अपनी ध्याण यानी बेटी के रूप में पूजा जाता है। ऐसे अवसर पर ज्योतिर्मठ से मातृशक्ति को भगवती उपासना की एक प्राचीन स्तोत्र परंपरा से जोड़ने की पहल ने धार्मिक-सांस्कृतिक क्षेत्र में विशेष ध्यान आकर्षित किया है।
ज्योतिर्मठ से शुरू हुई साधना, आगे पूरे उत्तराखंड तक पहुंचाने का संकल्प
पहले चरण में 9 माताओं द्वारा अध्ययन पूर्ण किया जाना इस प्रकल्प की शुरुआत है। अब इन साधिकाओं के माध्यम से ‘सौन्दर्यलहरी’ पाठ को अन्य महिलाओं तक पहुंचाने की योजना है।
ज्योतिर्मठ की आध्यात्मिक धरती से शुरू हुई यह पहल आने वाले समय में मातृशक्ति के माध्यम से उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों तक किस तरह विस्तार लेती है, इस पर अब सभी की नजरें हैं।















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