संस्कृति संसद 2026 में शामिल होने काशी पहुंचे ऋषि प्रसाद सती, गंगा महासभा ने किया आमंत्रित
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के उपाध्यक्ष एवं ज्योतिर्मठ के प्रधान पुरोहित ऋषि प्रसाद सती को संस्कृति, धर्म और सनातन परंपराओं के क्षेत्र में योगदान के लिए किया जाएगा सम्मानित
जनगणमन.लाइव
काशी। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के उपाध्यक्ष एवं ज्योतिर्मठ हिमालय के प्रधान पुरोहित पंडित ऋषि प्रसाद सती संस्कृति संसद 2026 में प्रतिभाग करने के लिए काशी पहुंच गए हैं। गंगा महासभा की ओर से उन्हें 3, 4 एवं 5 नवंबर को काशी में आयोजित संस्कृति संसद 2026 में गरिमामयी उपस्थिति के लिए आमंत्रित किया गया है।
गंगा महासभा द्वारा आयोजित इस तीन दिवसीय संस्कृति संसद में देशभर के संत-महात्मा, विद्वान, धर्माचार्य, कलाकार, जनप्रतिनिधि एवं विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशिष्ट व्यक्तित्व शामिल हो रहे हैं। आयोजन का उद्देश्य भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं, ज्ञान, कला, साहित्य, शिक्षा और राष्ट्रजीवन को समृद्ध बनाने में योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित करना है।
गंगा महासभा के आमंत्रण पत्र के अनुसार, संस्था की स्थापना महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने की थी। वर्ष 1905 से गंगा की अविरल-निर्मल धारा एवं भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए संगठन प्रयासरत है। वर्ष 2014 से संस्कृति संसद का आयोजन किया जा रहा है।
पंडित ऋषि प्रसाद सती बदरीनाथ-केदारनाथ धाम की धार्मिक परंपराओं, तीर्थाटन व्यवस्था एवं सनातन संस्कृति से जुड़े महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। उनके काशी पहुंचने से उत्तराखंड की धार्मिक एवं आध्यात्मिक परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व मिलेगा।
संस्कृति संसद के इस आयोजन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे संतों, विद्वानों और गणमान्य अतिथियों के बीच भारतीय संस्कृति एवं सनातन परंपराओं से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श भी होगा।
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